बांग्लादेश के संसदीय चुनावों में बांग्लादेश नैशनलिस्ट पार्टी के नेतृत्व वाले गठबंधन ने दो-तिहाई से ज्यादा बहुमत हासिल कर लिया है। बीएनपी के अध्यक्ष तारिक़ रहमान देश के नये प्रधानमंत्री होंगे। बीस साल बाद बीएनपी सत्ता में लौटी है। अभी तक कुल 299 में से 297 सीटों के नतीजों का ऐलान हो चुका है, जिसमें बीएनपी गठबंधन को 212 सीटों पर जीत हासिल हुई है, जबकि इस्लामी कट्टरपंथी जमात-ए-इस्लामी की अगुवाई वाले गठबंधन को सिर्फ 77 सीटें मिली हैं। आठ सीटें निर्दलीय उम्मीदवारों और छोटी पार्टियों को मिली है।
शेख हसीना की अवामी लीग 2008 से 2024 तक सत्ता में थी, लेकिन उसके चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। कल हुई वोटिंग में 59.44 प्रतिशत वोटरों ने अपने मत डाले। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तारिक़ रहमान को फोन कर उनकी “निर्णायक विजय” पर बधाई दी। मोदी ने सोशल मीडिया पर अपने पोस्ट में लिखा – “यह जनादेश आपके नेतृत्व में बांग्लादेश की जनता के विश्वास का परिचायक है। भारत एक लोकतांत्रिक, प्रगतिशील और समावेशी बांग्लादेश के प्रति अपना समर्थन जारी रखेगा। हमारे बहुआयामी संबंधों को और मजबूत करने और साझा विकास लक्ष्यों के लिए मैं आपके साथ काम करने की आशा रखता हूं।”
इस बार चुनाव में सेना ने निष्पक्ष भूमिका निभाई लेकिन मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने आखिर तक चुनाव लटकाने की कोशिश की। वह जानते थे कि BNP जीतेगी इसीलिए चुनाव टालकर जमात को पैर जमाने का मौका दिया, लेकिन जब सेना ने अपना रुख कड़ा किया, तब वह चुनाव के लिए राजी हुए। अब सवाल ये है कि इस चुनाव का भारत-बांग्लादेश रिश्तों पर क्या असर पड़ेगा? मुझे लगता है कि तारिक़ रहमान हों या जमात के अमीर शफीकुर रहमान, दोनों को भारत की अहमियत पता है, इसीलिए जमात के अमीर को कहना पड़ा कि उनकी पार्टी सत्ता में आने पर भारत से दोस्ती करेगी। तारिक़ रहमान भारत के साथ अच्छे संबंध चाहते हैं। उन्होंने बांग्लादेश में हिंदुओं को पूरी सुरक्षा देने का वादा किया है। उम्मीद है, वो जमात की तमाम तिकड़मों के बावजूद अपने वादे पर कायम रहेंगे। (रजत शर्मा)
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